कौन था हीरो आजादी का

तुम मुझे खून दो,
मैं तुम्हे आजादी दूंगा,
कह कर निकला एक व्यक्ति ने ।

यह की खून चाहिए किसका
ज्यादा कुछ नहीं कहा उसने,
आवाज़ गहरी थी, छु गई सबके दिल ने।

बच्चे पूछ ही रहे थे बापू से, 
खून मांगा है, बताया नहीं किसका ?
एक गाल पर जो कोई मारे थप्पड़  
परोस दो गाल भी दूसरा, समय था उसका
कब मिलेगी आजादी,पता नहीं था इसका। 

किसी को पता नहीं था, 
किधर चला गया था वो जादूगर
जब अचानक से बज उठा एक स्पीकर
फ़्री इंडिया रेडियो चलता था जिधर।

इससे पहले कि समझ पाते
कि वो नहीं था कोई रेडियो, 
वो था तब का यूट्यूब, 
खून से भागता भी भूत
तुम्हें निकालना अंग्रेजी खून,
आया ऐसा संदेश उधर से उसका।

गिरे एक दिन गए बम ऐसे, 
जवाब नहीं था जिसका,
कौन जीता कौन हारा, 
औकात नहीं थी करें जिक्र इसका
लगे पूछने लोग यह बात 
कौन हुआ बाप इस लड़ाई का। 

बात छिड़ी नई जिसकी हुई न बात कभी,
बाटेंगे कैसे जीती थी जो जमीन नई,
क्या होगा लड़ाई के लूट के माल का,
क्या वैसे जैसे किया था हाल अफ्रीका का
या वैसे जैसे बढ़े थे ऑस्ट्रेलिया अमरीका ।

होगी बात यही, जब होगी ख़तम लड़ाई
लगा रखा था उसने अनुमान इस बात का
कहेंगे नहीं था भारत कभी एक देश समूचा
था पहले से उसे ज्ञान इस बात का ।

इंडिया इज इंदिरा, इंदिरा इज इंडिया
वर्क फॉर टाटाज़, इन्वेस्ट इन अंबानीज़
इससे आगे नहीं होगा लिमिट इस देश का
वर्क फॉर इंडिया, इन्वेस्ट इन इंडियंस
नहीं बोल पाएगा कोई बच्चा इस देश का
था मालूम उसे उसी समय इस बात का ।

और रचा उसने खेल डिजाइन थिंकिग का
टू क्वालीफाई फॉर अ सोवरेन नेशन,
यू नीड अ सावरेन आर्मी, कहा उसने
कहा अंग्रेजी में इंडियन नेशनल आर्मी
आज़ाद हिन्द फौज, दी आवाज़ हिंदी में ।
डिजाइन इज नॉट द वे इट लूक्स,
डिजाइन इज द वे इट वर्क्स,बताया उसने।

1944 में मांगा 
खून के बदले आजादी उसने
1945 में बनाया उसे निर्णायक
और देखो कितना जलील है भारत 
करते हैं बहस, कौन था हीरो आजादी का।

Advertisements

Leave a Reply